भूस्खलन की जद में खूपी, एक साल बाद भी विस्थापन योजना अधूरी
June 09, 2026
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जनहित
नैनीताल: मानसून की आहट के साथ ही नैनीताल के समीप स्थित खूपी गांव के ग्रामीणों की चिंताएं फिर गहरा गई हैं। वर्षों से भूस्खलन और भू-कटाव की मार झेल रहे गांव में घरों, आंगनों और रास्तों में पड़ रही दरारें लगातार चौड़ी होती जा रही हैं। ऐसे में ग्रामीण एक बार फिर किसी बड़े हादसे की आशंका के बीच जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
खूपी गांव वर्ष 2011-12 से लगातार भूस्खलन की चपेट में है। गांव की तलहटी में हो रहे भू-कटाव के चलते कई मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। हर साल ग्रामीण अस्थायी मरम्मत कर अपने घरों को बचाने का प्रयास करते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही स्थिति फिर गंभीर हो जाती है। कई परिवारों को मजबूरन अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों में कुमाऊं कमिश्नर, जिलाधिकारी और एसडीएम समेत कई अधिकारियों ने गांव का निरीक्षण किया और आश्वासन दिए, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया। बीते वर्ष भूस्खलन प्रभावित परिवारों के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जगी थी, मगर एक साल बीतने के बाद भी प्रशासन सुरक्षित भूमि का चयन नहीं कर सका है।
प्रशासन ने 17 प्रभावित परिवारों के विस्थापन के लिए सूची तैयार की थी और दो संभावित स्थान भी चिह्नित किए गए थे, लेकिन भू-वैज्ञानिकों ने उन्हें उपयुक्त नहीं माना। इसके बाद से वन विभाग के सहयोग से नई भूमि की तलाश की जा रही है। इस बीच बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग की ओर से गांव की तलहटी में किए गए अस्थायी सुरक्षा कार्य भी बरसात का दबाव झेलने में सक्षम नहीं हैं। उनका आरोप है कि योजनाएं और घोषणाएं कागजों तक सीमित हैं, जबकि गांव के लोग रोजाना खतरे के साये में जीने को मजबूर हैं।
स्थानीय निवासी लीलाधर ने कहा कि सिंचाई विभाग द्वारा गधेरे में चैकडैम बनाए जाने के बाद गांव की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी कार्य नहीं किया गया। वहीं प्रमोद कुमार ने बताया कि हर बरसात के साथ घरों और रास्तों की दरारें बढ़ रही हैं तथा गांव का मुख्य मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो चुका है, लेकिन अब तक स्थायी उपचार नहीं किया गया।
इधर एसडीएम नैनीताल नवाजिश खलिक ने बताया कि भूस्खलन प्रभावित परिवारों के विस्थापन के लिए भूमि की तलाश जारी है। उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी) की टीम क्षेत्र का निरीक्षण कर चुकी है और जल्द ही स्थायी ट्रीटमेंट योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि बरसात को देखते हुए प्रशासन क्षेत्र की लगातार निगरानी कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि खूपी के साथ-साथ आलूखेत, भुमियाधार और ढुंगसिल गांवों में भूस्खलन की समस्या के स्थायी समाधान के लिए यूएलएमएमसी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे प्रभावित क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा योजना तैयार होने की उम्मीद है।
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